12th Physics Chapter 1 Subjective

  1. वैद्युत आवेश के क्वाण्टीकरण (quantisation) का मूल कारण क्या है?

उत्तर- इसका मूल कारण यह है कि एक वस्तु से दूसरी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण केवल पूर्णांक संख्याओं में ही हो सकता है।

  1. बलों के अध्यारोपण का सिद्धान्त क्या है?

उत्तर- “यदि किसी निकाय में अनेक आवेश हों, तो उनमें से किसी एक आवेश पर बल, अन्य आवेशों के कारण अलग-अलग बलों को सदिश योग होता है, यही बलों के अध्यारोपण का सिद्धान्त कहलाता है।”

  1. इलेक्ट्रॉन वोल्ट की परिभाषा दीजिए तथा इसका संख्यात्मक मान जूल में व्यक्त कीजिए।

उत्तर- एक इलेक्ट्रॉन वोल्ट वह ऊर्जा है जो किसी इलेक्ट्रॉन से 1 वोल्ट विभवान्तर द्वारा त्वरित होने पर अर्जित होती है।
अर्थात् 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट = 1.6 x 10-19 जूल

  1. एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन एक समान वैद्युत क्षेत्र में रखे गए हैं। किसका त्वरण अधिक होगा और क्यों

उत्तर- इलेक्ट्रॉन का त्वरण अधिक होगा, क्योंकि प्रोटॉन की अपेक्षा इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान कम होता है।

  1. किसी आवेशित कण के भार को एक वैद्युत-क्षेत्र द्वारा किस प्रकार सन्तुलित किया जाता है

उत्तर- कण पर आवेश की प्रकृति के अनुसार उस पर वैद्युत-क्षेत्र ऐसी दिशा में लगाकर, ताकि उसके कारण कण पर लगने वाला वैद्युत बल ऊर्ध्वाधरत: ऊपर की ओर अर्थात् कण के भार की विपरीत दिशा में कार्य करे तथा परिमाण में इसके बराबर हो।

  1. आवेशित खोखले गोलाकार चालक के भीतर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता कितनी होती है?

उत्तर- शून्य।

  1. वैद्युत स्थितिकी में गाउस का प्रमेय लिखिए।

उत्तर- गॉस का नियम : वह नियम है जो विद्युत आवेश के वितरण एवं उनके कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र में संबंध स्थापित करता है।

इस नियम के अनुसार, “किसी बंद तल से निकलने वाला विद्यत फ्लक्स उस तल द्वारा घिरे हुए कुल विद्युत आवेश की मात्रा का 1 / ε गुणा होता है।

  1. स्थिर वैद्यत परिरक्षण क्या है? इसका उपयोग लिखे।

उत्तर- स्थिर विद्युत परीक्षण-स्थिर वैद्युत परिरक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी आंतरिक charge क्षेत्र को बाहरी विद्युत क्षेत्र से बचाया जाता है। इसे Faraday पिंजरा भी कहते हैं। इस प्रक्रिया में फैराडे पिंजरा किसी बाहरी विद्युत क्षेत्र को कार्यान्वित होने से रोक देता है, जिसके आंतरिक क्षेत्र के contents पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

उपयोग :- इस प्रक्रिया का उपयोग विद्युत उपकरणों में किया जाता है।

  1. आवेश +q1, +q2, और -q3, के पास रखे बन्द सतह ABC पर विद्युतक्षेत्र के फ्लक्स का मान क्या होगा? 

उत्तर- कुल फ्लक्स शून्य होगा, क्योंकि सतह के अंदर कुल Charge शून्य है।

  1. वायुमण्डल वैद्युत उदासीन नहीं होता है समझाइए क्यों

उत्तर- वायुमंडल वैद्युत जिसमें वायुमण्डल में उपस्थित विद्युत आवेश के बारे में अध्ययन करते हैं। पृथ्वी की सतह, वायुमंडल तथा आयनोस्पेयर के बीच आवेशों की गति को global atmospheric electrical circuit ‘ जानते हैं। वायुमंडल वैद्युत एक प्रकार का Topic है, जिसमें electrostatics atmospheric physics, meterology & earth science के बारे में study करते हैं। इस प्रकार वायुमंडल वैद्युत उदासीन नहीं होता है।

  1. विद्युत फ्लक्स को परिभाषित करें। इसके SI मात्रक को लिखा-

उत्तर– किसी सतह के हर बिंदु पर वैद्युत तीव्रता परिभाषित हो, तो सतह के अभिलंब क्षेत्रफल सदिश के साथ तीव्रता सदिश का आपस गुणनफल ही वैद्युत फ्लक्स कहलाता है।

विद्युत फ्लक्स का SI मात्रक = (विद्युत-क्षेत्र का SI मात्रक) (क्षेत्रफल का SI मात्रक)

= (V m-1) (m) = V.m.

  1. जब काँच की छड़ को रेशम के टुकड़े से रगड़ते हैं तो दोनों पर आवेश आ जाता है। इसी प्रकार की परिघटना का वस्तुओं के अन्य युग्मों में भी प्रेक्षण किया जाता है। स्पष्ट कीजिए कि यह प्रेक्षण आवेश संरक्षण नियम से किस प्रकार सामंजस्य रखता है?

उत्तर- घर्षण द्वारा आवेशन की घटनाएँ आवेश संरक्षण नियम के साथ पूर्ण सामंजस्य रखती हैं। जब इस प्रकार की किसी घटना में दो उदासीन वस्तुओं को रगड़ा जाता है तो दोनों वस्तुएँ आवेशित हो जाती हैं। घर्षण से पूर्व दोनों वस्तुएँ उदासीन होती हैं अर्थात् उनका कुल आवेश शून्य होता है। इस प्रकार के सभी प्रेक्षणों में सदैव यह पाया गया है कि एक वस्तु पर जितना धनावेश आता है, दूसरी वस्तु पर उतना ही ऋणावेश आता है। इस प्रकार घर्षण द्वारा आवेशन के बाद भी दोनों वस्तुओं का नेट आवेश शून्य ही बना रहता है।

  1. (a) स्थिर विद्युत-क्षेत्र रेखा एक सतत वक्र होती है अर्थात कोई क्षेत्र रेखा एकाएक नहीं टूट सकती क्यों?
    (b) स्पष्ट कीजिए कि दो क्षेत्र रेखाएँ कभी-भी एक-दूसरे का प्रतिच्छेदन क्यों नहीं करतीं?

उत्तर- (a) विद्युत-क्षेत्र रेखा वह वक्र है जिसके प्रत्येक बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है। ये क्षेत्र रेखाएँ सतत वक्र होती हैं अर्थात् किसी बिन्दु पर एकाएक नहीं टूट सकतीं, अन्यथा उस बिन्दु परे विद्युत-क्षेत्र की कोई दिशा ही नहीं होगी, जो असम्भव है।
(b) दो विद्युत-क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित नहीं कर सकतीं; क्योंकि इस स्थिति में कटान बिन्दु पर दो स्पर्श रेखाएँ खींची जाएँगी जो उस बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की दो दिशाएँ प्रदर्शित करेंगी जो असम्भव है।

  1. विभव-प्रवणता का मात्रक एवं विमीय सूत्र लिखिए।

उत्तर  मात्रक- वोल्ट/मीटर

तथा विमा – [MLT-3A-1]

  1. दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 50 V है। एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक 2 x 10-5कूलॉम आवेश को ले जाने पर कितना कार्य करना होगा 

उत्तर  कार्य (W) = आवेश x विभवान्तर = 2 x 10-5 कूलॉम x 50 वोल्ट = 10-3 जूल।

  1. संधारित्र में साधारणतया प्रयुक्त होने वाले किन्हीं दो परावैद्युत पदार्थों के नाम लिखिए।

उत्तर- अभ्रक व काँच।

  1. 10 सेमी की दूरी पर स्थित दो बिन्दु व के विभव क्रमशः +10 वोल्ट तथा –10 वोल्ट हैं। कूलॉम आवेश को से तक ले जाने में कितना कार्य करना होगा

उत्तर  1.0 कूलॉम आवेश को A से B तक ले जाने में किया गया कार्य
W = (VB – VA) q0 = (-10 – 10) x 1.0 = -20 जूल
अत: कार्य प्राप्त होगा।

  1. सम-विभव पृष्ठ से क्या तात्पर्य है

उत्तर  किसी वैद्युत क्षेत्र में खींचा गया वह पृष्ठ जिस पर स्थित सभी बिन्दुओं पर वैद्युत विभव बराबर हो, समविभव पृष्ठ कहलाता है।

  1. एक आवेशित संधारित्र एवं एक वैद्युत सेल में मूल अन्तर क्या है

उत्तर  आवेशित संधारित्र में वैद्युत आवेश संग्रहीत रहता है, जबकि वैद्युत सेल में वैद्युत आवेश का प्रवाह होता है।

  1. किसी समविभव पृष्ठ के दो बिन्दुओं के मध्य 800 μC आवेश को गति कराने में कितना कार्य होगा?

उत्तर  समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विभव का मान समान होता है। अतः पृष्ठ के किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर ΔV = 0
अतः q = 800 μC = 800 x 10-6 कूलॉम को इन बिन्दुओं के बीच गति कराने में किया गया कार्य
W = q x ΔV = (800 x 10-6) x 0 = 0 (शून्य) [∴ 1 μC = 10-6 C]

  1. संधारित्र किसे कहते हैं

उत्तर  संधारित्र एक ऐसा समायोजन है जिसमें किसी चालक के आकार में परिवर्तन किये बिना उस पर आवेश की पर्याप्त मात्रा संचित की जा सकती है।

  1. K.S. पद्धति में धारिता की विमा लिखिए। इसका मात्रक क्या है?

उत्तर  धारिता की विमा [M-1L-2T4A2] तथा मात्रक फैरड है।

  1. दो वैद्युत बल रेखाएँ क्यों एक-दूसरे को काट नहीं सकती हैंक्या दो समविभव सतह काट सकती हैं

उत्तर  कोई भी दो वैद्युत् क्षेत्र रेखाएँ परस्पर एक-दूसरे को काट नहीं सकती हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में कटान बिन्दु पर दो स्पर्श रेखाए जा सकती हैं जो एक ही बिन्द पर वैद्यत क्षेत्र की दो दिशाओं का प्रदर्शित  करेंगी जो सम्भव नहीं है। दो समविभव सतह भी काट नहीं सकती हैं क्योंकि कटान बिन्द पर विभव के दो मान होंगे जोकि असम्भव हैं

  1. समान्तर प्लेट संधारित्र में दूसरी प्लेट का क्या कार्य है

उत्तर  संधारित्र की दूसरी प्लेट पहली प्लेट को दिये गये आवेश की प्रकृति के विपरीत प्रकृति के आवेश से आवेशित होकर (स्थिर वैद्युत प्रेरणा द्वारा) पहली प्लेट के विभव को कम कर देती है जिससे कि प्लेटों के बीच विभवान्तर कम हो जाता है जिसके फलस्वरूप संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है अर्थात् पहली प्लेट पर और आवेश संग्रहित किया जा सकता है।

  1. संघारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले दो कारक को लिखें-

उत्तर  संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले दो कारक इस प्रकार है-

(i) Plate का क्षेत्र।              (ii) Plates के बीच की दूरी

  1. स्थिर वैद्युत परिरक्षणं (Electrostatic Shielding) क्या हैइसके एक जीवन उपयोगी उपयोग को लिखिए।

उत्तर  स्थिर वैद्युत परिरक्षण किसी खोखले अथवा ठोस आवेशित चाल को दिया गया आवेश उसके पृष्ठ पर ही रहता है। अतः इसके वैद्युत क्षेत्र की वैद्युत बल रेखाएँ चालक के अन्दर प्रवेश नहीं करती हैं। अतः किसी वैद्युत उपकरण को बाह्य वैद्युत क्षेत्र के प्रभाव से बचाने के लिए इसको गोलीय खोखले चालक के अन्दर रखा जाता है। बाह्य वैद्युत क्षेत्र की वैद्युत बल रेखाएँ चालक के पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होगा, इसके अन्दर प्रवेश नहीं करेंगी। अतः वैद्युत उपकरण सुरक्षित रहेगा। यह प्रक्रिया विद्युत् परिरक्षण कहलाती है।

व्यावहारिक उपयोग :- इस सिद्धान्त के आधार पर ही वर्षा के समय बादलों के घर्षण से उत्पन्न तीव्र वैद्युत से बचने के लिए किसी कार में बैठा व्यक्ति कार की खिड़कियों को बन्द कर लेता है। अतः इस प्रकार चालक कार एक खोखले चालक कोश की भाँति व्यवहार कर उस व्यक्ति को वैद्युत के प्रभाव से बचाये रखता है।

  1. rत्रिज्या तथा q1आवेश वाला एक छोटा गोला r2त्रिज्या और q2 आवेश के गोली खोल (कोश) से घिरा है। दर्शाइए यदि qधनात्मक है तो (जब दोनों को एक तार द्वारा जोड़ दिया जाता है) आवश्यक रूप से आवेशगोले से खोल की तरफ ही प्रवाहित होगाचाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी हो।

उत्तर  हम जानते हैं कि किसी चालक का सम्पूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर रहता है; अतः जैसे ही दोनों गोलों को चालक तार द्वारा जोड़ा जाएगा वैसे ही अन्दर वाले छोटे गोले को सम्पूर्ण आवेश तार से होकर बाहरी खोल की ओर प्रवाहित हो जाएगा, चाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी क्यों न हो।

परावैद्युत पदार्थ क्या है

उत्तर  परावैद्युत पदार्थ वह पदार्थ होता है जिसके अन्दर सभी परमाणुओं में उनके सभी इलेक्ट्रॉन नाभिक के आकर्षण बल से दृढ़तापूर्वक बँधे रहते हैं। अतः ऐसे पदार्थों में वैद्युत चालन के लिए कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध नहीं होता अथवा मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या नगण्य होती है। अतः परावैद्युत पदार्थ वे पदार्थ हैं जिनमें होकर वैद्युत प्रवाह नहीं होता। फिर भी यदि कोई वैद्युत-क्षेत्र किसी परावैद्युत पदार्थ पर आरोपित  किया जाता है तो परावैद्युत पदार्थ के पृष्ठों पर प्रेरित आवेश उत्पन्न हो जाता है। अतः परावैद्युत पदार्थ वे कुचालक (insulator) पदार्थ हैं जिनमें वैद्युत प्रभाव (electric effects) बिना वैद्युत चालन के संचरित होते हैं।” किसी वैद्युत चालक के किसी बिन्दु पर दिया गया आवेश उसकी पूरी सतह पर शीघ्रता से फैल जाता है, जबकि किसी परावैद्युत के किसी बिन्दु पर दिया गया आवेश उसी के निकटवर्ती क्षेत्र में स्थिर रहता है। उदाहरण-काँच, रबर, प्लास्टिक, ऐबोनाइट, माइका, मोम, कागज, लकड़ी आदि।

  1. किसी परावैद्युत पदार्थ के वैद्युत ध्रुवण से क्या तात्पर्य है?

उत्तर  द्युत धुवण- किसी परावैद्युत अथवा विद्युतरोधी को बाह्य वैद्युत क्षेत्र में रखने पर इसके धन व ऋण आवेशों के केन्द्र पृथक्-पृथक् हो जाते हैं, जिससे इनमें वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण प्रेरित हो जाते हैं। ऐसे परावैद्युत को ध्रुवित होना कहते हैं तथा इस घटना को वैद्युत ध्रुवण कहते हैं।

  1. संधारित्रों में परावैद्युत के उपयोग से धारिता क्यों बढ़ जाती है?
    या
    किसी संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत पदार्थ भरने पर इसकी धारिता पर क्या प्रभाव पड़ता है

उत्तर  संधारित्रों की प्लेटों के बीच परावैद्युत भरने से इसके अन्दर प्लेटों के बीच उपस्थित वैद्युत-क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक आन्तरिक वैद्युत-क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है, जो इसकी सतह पर प्लेटों के विपरीत आवेश के प्रेरित होने से उत्पन्न होता है। अतः प्लेटों के बीच विभवान्तर घट जाता है, जिसके परिणामस्वरूप धारिता बढ़ जाती है।

  1. परावैद्युत सामर्थ्य एवं भंजक विभवान्तर को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर  परावैद्युत सामर्थ्य- परावैद्युत पर आरोपित वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता का वह अधिकतम मान जिसको परावैद्युत बिना परावैद्युत भंजन के सहन कर सकता है, परावैद्युत की परावैद्युत सामर्थ्य कहलाती है।

भंजक विभवान्तर- किसी परावैद्युत पदार्थ के भंजक हुए बिना उसके दोनों सिरों के बीच लगाए गए वैद्युत विभवान्तर के अधिकतम मान को उस परावैद्युत का भंजक विभवान्तर कहते हैं।

 

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